गुलदस्ता - 5


                 " महमान "


कुछ समय के लिए ही होते हैं यह महमान,

बचपन,जवानी,दौलत,इज़्ज़त और शान,

इस सच्चाई से अगर ना हटे अपना ध्यान,

तो हर मुसीबत से बचना है बेहद आसान ।

_____________


                   " फ़ूल "


खिलते हैं फ़ूल मगर कान्टों में फ़ंस कर,

मिलते हैं लोग, कर के भूल जीवन भर,

फ़ैलाते हैं महक और ताज़गी हर डगर,

इस तरह रंग बिखर सब झुकाते हैं सर ।

_____________


                   " साँस "


गिनी चुनी साँस लेकर यहाँ आते हैं हम,

जैसे यह खत्म हो जाए, तोड देते हैं दम,

किसी काम के लिये गर समय लागे कम,

तो भी जुट जाए, शायद कल न रहे हम ।

_____________


                 " इबादत "


कहते है कि मोहब्बत भी है एक इबादत,

तो मेरी रही यह छोटी सी एक नसीहत,

क्यों न छोड़ ही दें गुस्सा ओर नफ़रत,

जिस से बिगड़ जाती हैं अपनी फ़ितरत ।

_____________


                  " यक़ीन "


भैंस के आगे अगर बजाए बीन,

तो हो जाती है अपनी ही तौहीन,

असर नही होगा कर लो यक़ीन,

अम्बर झुकता क्या देख ज़मीन ?

_____________


                 " नसीब "


अब तक जो नज़र आया, लगा मुझे बहुत अजीब,

महनतकश के लिए सिर्फ़ नाम का ही है नसीब,

राजा बिल्कुल नही बन सकता है एक ग़रीब,

मान ले यह बात, हक़ीक़त के है काफ़ी क़रीब ।

_____________


                 " इन्सान "


ज़िन्दगी जिस के लिये मौत जैसी  हो गयी,

ऐसे इन्सान को कौन सी सुबह लगेगी नयी,

जब दिन में भी रात की स्याही ही आने लगी,

हर समय ग़म के सिवा कुछ भी तो नही रही ।

_____________


                   " क़दर "


अब तो शायद नही रही मेरी कोई क़दर,

जब से अपने ही नाम का नही रहा घर,

इस लिये ए ज़िन्दगी तू पीछा मत कर,

ओर जी लेने से क्या हो जाऊँगा अमर ?

_____________


                 " परवाह "


चलता तो रहा हूँ बिन किये परवाह,

हटा नही सका इस डगर से निगाह,

क्या मंज़िल की तरफ़ है यह राह ?कृपा करके कोई तो दे मुझे सलाह ।

_____________


                  " जाग "


बुरा वक्त सदा छोड़ दे जाता है गहरा दाग,

मगर कल की वजह से यूँ आज से मत भाग,

सुन लेने की कोशिश करें खुशी से भरा राग,

उम्मीद और उत्साह के साथ हर  सवेरे जाग ।

_____________


Comments

Popular Posts