गुलदस्ता - 6
" गुलज़ार "
पीछे मुड कर देखना तो है बेकार,
आयेगा कभी नही हाथ में गुलज़ार,
इसी सच्चाई पर सदा रहे एतबार,
किसी को किसी का नही इन्तज़ार.
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" कोई "
इस सन्सार में नही कोई अपना या पराया,
बगीचे में भी फ़ूल खिला और फ़िर मुरझाया,
अकलमंद लोगों ने तो यह अक्सर दोहराया,
फ़िर भी ऐसे रिश्तों ने सभी को रुलाया ।
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" विकास "
आखिर क्या होता है यह विकास,
जब तन और मन में हो विश्वास ?
या जब औरों को भी हो एहसास,
कि यह बन्दा है सचमुच ही खास ।
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पीछे मुड कर देखना तो है बेकार,
आयेगा कभी नही हाथ में गुलज़ार,
इसी सच्चाई पर सदा रहे एतबार,
किसी को किसी का नही इन्तज़ार.
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" कोई "
इस सन्सार में नही कोई अपना या पराया,
बगीचे में भी फ़ूल खिला और फ़िर मुरझाया,
अकलमंद लोगों ने तो यह अक्सर दोहराया,
फ़िर भी ऐसे रिश्तों ने सभी को रुलाया ।
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" विकास "
आखिर क्या होता है यह विकास,
जब तन और मन में हो विश्वास ?
या जब औरों को भी हो एहसास,
कि यह बन्दा है सचमुच ही खास ।
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" ज़हर "
दिल की बातों को ज़रूर लानी चाहिए लबों पर,
सच को स्वीकार कर ने से आसान होता है डगर,
इस सीधी सी सलाह में नहीं है कोई अगर या मगर,
ज़हन में छुपा ले ने से यह बन सकता है ज़हर ।
दिल की बातों को ज़रूर लानी चाहिए लबों पर,
सच को स्वीकार कर ने से आसान होता है डगर,
इस सीधी सी सलाह में नहीं है कोई अगर या मगर,
ज़हन में छुपा ले ने से यह बन सकता है ज़हर ।
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" मा "
जीवन के हर मोड पर रही प्यार का सागर,
बचपन में अक्सर रही सुरक्षा का सागर,
अर्पित है तेरे पैरों तले, मेरा प्रेम और आदर,
मा तू ने हर पल दिया मुझे सहारा बराबर ।
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" पिता "
बचपन और जवानी में ,मा का लाडला रहा,
काफ़ी हद तक यह रिश्ता आप ने सहा,
इस बात को लेकर कभी नहीं हुए खफ़ा,
दूर रहते हुए भी कम नही हुआ वफ़ा ।
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" एहसास "
अक्सर तनाव में यूँ होता है एक एहसास,
पिछले जनम में बाक़ी रह गई एक प्यास,
जो आज मुझे दिखाती है एक राह खास,
वक्त ही ज़ाहिर करेगा अगर यह है बकवास ।
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" मौत "
मौत का असर क्यों होता है इतना गहरा,
हर चेहरे से उड जाता है रंग सुनहरा,
जैसे कि गिर गया हो अपने सर से सहरा,
ऐसे में बढाने लगते है सुरक्षा और पहरा ।
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" भाई "
जब छोटा भाई अचानक दम तोड देता है,
तब किस्मत के खेल का एहसास हो जाता है,
समय की इच्छा से ही आगे कल आ सकता है,
कहीं कोई रोता है और कहीं कोई मुस्कुराता है ।
जब छोटा भाई अचानक दम तोड देता है,
तब किस्मत के खेल का एहसास हो जाता है,
समय की इच्छा से ही आगे कल आ सकता है,
कहीं कोई रोता है और कहीं कोई मुस्कुराता है ।
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" इश्क "
सुना तो है कि इश्क पर नही कोई ज़ोर,
जवानी के दिन, मन में नाचता है मोर,
बेचैनी से इन्तज़ार है कि कब होगा भोर,
ताकि पलंग से उठ करे धीरे से कुछ शोर ।
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सुना तो है कि इश्क पर नही कोई ज़ोर,
जवानी के दिन, मन में नाचता है मोर,
बेचैनी से इन्तज़ार है कि कब होगा भोर,
ताकि पलंग से उठ करे धीरे से कुछ शोर ।
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