गुलदस्ता - 8
" हादसा "
मेरी जवानी के दिनों का है यह हादसा,
कर दूँ क्या मैं अब इस बात का खुलासा ?
एक रोग तो यूँ ही लग गया था खासा,
उस चेहरे की दीदार का हुआ था मैं प्यासा ।
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" आदत "
बिना सोचे समझे ही शुरू होता है नशे की आदत,
पर समय के साथ लग जाती है इस की ऐसी लत,
जो बेवजह बिगाड़ देने लगती है अपनी फ़ितरत,
अफ़सोस, कि कम मानते हैं कि यही है हक़ीक़त ।
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" रहमत "
अपने जीवन में अनिवार्य है कि साथ दे किस्मत,
यह मुश्किल नही जब हरदम रहे अच्छी ही संगत,
अलावा इस के अगर हो खुदा की भी कुछ रहमत,
ऐसी ज़िन्दगी..।।.।।।।...सलामत
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" मुराद "
किसी से पुनः मिलने की थी मन की एक मुराद,
पर जब मिलने की आयी घडी तीस साल बाद,
घबराहट में दिल से कर ने लगा फ़रियाद,
कि इन बीती बातें अब क्यों आ गयीं याद ? !
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